बच्चेदानी में गांठ है तो जरूर करें ये 4 योगासन, समस्या से मिलेगी राहत | yoga for uterus fibroids in hindi


Yoga For Fibroids- अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खराब खान-पान के कारण महिलाओं को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। महिलाओं में शारीरिक गतिविधियों की कमी, शराब का सेवन और स्मोकिंग करने जैसी आदतें प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इन्हीं समस्याओं में फाइब्रॉइड यानी बच्चेदानी में गांठ (Uterine Fibroids) की समस्या भी शामिल है। अगर महिलाओं के बच्चेदानी में गांठ हो जाए, तो उन्हें गर्भधारण करने में मुश्किल हो सकती है। फाइब्रॉइड की समस्या से राहत पाने के लिए दवाओं का सेवन करती है, लेकिन इसके साथ शारीरिक गतिविधियां करना भी बहतु जरूरी (Can Yoga Cure Uterus Fibroids) है। ऐसे में आइए नमस्ते योग क्लासेज की योग और फिटनेस एक्सपर्ट अमीषा ए. शाह से जानते हैं बच्चेदानी में गांठ हो तो कौन सा योग करना चाहिए?

बच्चेदानी में गांठ होने पर कौन-से योगासन करें? – Which Yoga Is Best To Cure Fibroids in Hindi?

1. मत्स्येन्द्रासन – Matsyendrasana

बच्चेदानी में गांठ की समस्या से बचाव के लिए आप मत्स्येन्द्रासन कर सकते हैं। यह आसन अग्न्याशय (पेट में स्थित एक अंग) को उत्तेजित करता है, जिससे अपच की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। इतना ही नहीं यह आसन साइटिका से निपटने में फायदेमंद हो सकता है।

2. पश्चिमोत्तानासन – Variation Of Paschimottanasana

पश्चिमोत्तानासन को अलग-अलग तरह से करना भी फाइब्रॉएड की समस्या में फायदेमंद हो सकता है। यह आसन ब्लड सर्कुलेशन में सुधार, पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन को कम करने और आपके शरीर की ताकत बढ़ाने में मदद करता है। 

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3. सुखासन के साथ कंधे का खिंचाव – Shoulder Stretch In Sukhasana 

सुखासन, या आसान मुद्रा, एक योग मुद्रा है जो पीठ और कंधे की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ रीढ़ की हड्डी में सुधार करने में मदद कर सकती है। इस मुद्रा का अभ्यास करने से आपके शरीर की मुद्रा में सुधार के साथ थकान कम करने और छाती की मांसपेशियों को चौड़ा करने में मदद मिल सकती है, जो आपके पेट के लिए भी फायदेमंद है। 

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4. डायाफ्रामिक ब्रीथिंग – Diaphragmatic Breathing

डायाफ्रामिक ब्रीथिंग लेने से तनाव कम करने में मदद मिल सकती है, जो फाइब्रॉएड का लक्षण हो सकता है। यह सांस लेने से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे चिंता, अस्थमा और सीओपीडी में भी मदद कर सकता है। इसके अलावा डायाफ्रामिक ब्रीथिंग आप में आत्म जागरूकता बढ़ाने में भी फायदेमंद हो सकती है।

पेट में गांठ होने की समस्या से बचाव के लिए किसी भी तरह की एक्सरसाइज या योगासन को अपने फिटनेस रूटीन में शामिल करने से पहले हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह जरूर ले लें। 

Image Credit- Freepik

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