बरेली की जीवनरेखा: रामगंगा नदी
बरेली शहर मुख्य रूप से रामगंगा नदी के तट पर बसा हुआ है। रामगंगा, जो कि गंगा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है, उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में दूधतोली पर्वत श्रृंखला से निकलती है। यह नदी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर बहती है, जिसमें बरेली भी शामिल है, और अंततः कन्नौज के पास गंगा नदी में मिल जाती है। रामगंगा नदी का बरेली के भूगोल, कृषि और ऐतिहासिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है, और यह शहर की प्राकृतिक पहचान का एक अभिन्न अंग है।
हालांकि रामगंगा नदी बरेली शहर के केंद्र से सीधे होकर नहीं बहती, लेकिन यह शहर के विभिन्न हिस्सों से लगभग 10 से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शहर के पास रामगंगा नदी पर बैराज (Barrage) और पुल (Bridges) बने हुए हैं, जो यातायात और जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस नदी का जलस्तर विशेष रूप से मानसून के मौसम में बढ़ जाता है, जिससे आसपास के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ (Flood) का खतरा भी बना रहता है, जिसके लिए प्रशासन हमेशा अलर्ट पर रहता है।
रामगंगा के अलावा, बरेली और इसके आसपास के क्षेत्रों में कई छोटी नदियाँ और जलधाराएँ भी बहती हैं, जो इसकी जल प्रणाली का समर्थन करती हैं। इनमें बहगुल (Bahgul), पीलाखार (Pilakhar), भाखड़ा (Bhakhra), और किच्छा (Kichha) जैसी नदियाँ शामिल हैं। इनमें से कुछ नदियाँ या तो रामगंगा की सहायक नदियाँ हैं या स्थानीय जलस्रोतों के रूप में काम करती हैं। ये छोटी नदियाँ विशेष रूप से वर्षा ऋतु में सक्रिय हो जाती हैं और क्षेत्र की कृषि भूमि को सिंचित करने में मदद करती हैं।
संक्षेप में, रामगंगा नदी को ही बरेली की मुख्य नदी और उसकी जीवनरेखा माना जाता है। इस नदी का महत्व केवल जल आपूर्ति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर के इतिहास, पौराणिक कथाओं और पर्यावरण का भी एक हिस्सा रही है। चाहे वह सिंचाई हो, भूजल स्तर को बनाए रखना हो, या बाढ़ प्रबंधन, रामगंगा बरेली के लिए एक केंद्रीय भौगोलिक विशेषता बनी हुई है।
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